मौलिक रूप से हमारा समाज एक पुरुष प्रधान समाज रहा है. महिलाओं को हमेशा यहां दोयम दर्जे का स्थान ही प्रदान किया गया है. पहले महिलाओं के पास किसी भी प्रकार की स्वतंत्रता ना होने के कारण उनकी सामाजिक और पारिवारिक स्थिति एक पराश्रित से अधिक और कुछ नहीं थी, जिसे हर कदम पर एक पुरुष के सहारे की जरूरत पड़ती थी. वैसे तो आजादी के बाद से ही महिला उत्थान के उद्देश्य से विभिन्न प्रयास किए जाते रहे हैं. लेकिन पिछले कुछ वर्षों में महिला सशक्तिकरण की बयार में अत्याधिक तेजी देखी गई है. इन्हीं प्रयासों के परिणामस्वरूप महिलाओं के आत्मविश्वास में कई गुणा बढ़ोतरी हुई है और वे किसी भी चुनौती को स्वीकार करने के लिए खुद को तैयार करने लगी हैं. जहां सरकारें महिला उत्थान के उद्देश्य से नई-नई योजनाएं बनाने लगी हैं, वहीं कई गैर-सरकारी संगठन भी उनके अधिकारों के लिए अपनी आवाज बुलंद करने लगे हैं. नारी सशक्तिकरण के तहत महिलाओं के भीतर ऐसी प्रबल भावना को उजागर करने का प्रयास भी किया जा रहा है कि वह अपने भीतर छिपी ताकत को सही मायने में उजागर कर, बिना किसी सहारे के आने वाली हर चुनौती का सामना कर सकें.